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सोडियम-आयन बैटरी की बड़ी उपलब्धि: क्या यह इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) के लिए असली गेम-चेंजर साबित होगी?

EVs

इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग ने साल 2025 के अंत में एक बहुत बड़ा क्रांतिकारी बदलाव देखा है। लंबे समय से सोडियम-आयन बैटरी को केवल एक माध्यमिक तकनीक माना जाता था, लेकिन अब यह ईवी बैटरी की दौड़ में एक गंभीर दावेदार के रूप में उभरी है।

इस बदलाव को दो प्रमुख विकासों ने चिह्नित किया है: पहला CATL द्वारा अपने 'नेक्स्ट्रा' (Naxtra) सोडियम-आयन सेल का कमर्शियल उत्पादन और दूसरा झाओना न्यू एनर्जी द्वारा हाई-डेंसिटी सॉलिड-स्टेट सोडियम-आयन प्रोटोटाइप की घोषणा।

ये तकनीकी सफलताएं सोडियम को किफायती और टिकाऊ बैटरी तकनीक की श्रेणी में सबसे आगे ले जा सकती हैं। यह विकास न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कारों की कीमतों को भी कम करने में मदद करेगा।

CATL और झाओना न्यू एनर्जी की तकनीकी उपलब्धियां

दिग्गज बैटरी निर्माता CATL ने अप्रैल 2025 में अपना 'नेक्स्ट्रा' सोडियम-आयन ब्रांड लॉन्च किया था। इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन दिसंबर में शुरू हुआ, और इन नए सेल्स ने 175 Wh/kg का ऊर्जा घनत्व (Energy Density) हासिल कर लिया है।

यह प्रदर्शन कई लिथियम आयरन फॉस्फेट (LFP) बैटरियों से बेहतर है, जिनकी क्षमता आमतौर पर 160 से 170 Wh/kg के बीच होती है। नेक्स्ट्रा सेल्स अब फुल-साइज ईवी को 500 किलोमीटर तक की ड्राइविंग रेंज देने में पूरी तरह सक्षम हैं।

इसके साथ ही झाओना न्यू एनर्जी ने दिसंबर में एक और मील का पत्थर स्थापित किया। कंपनी ने एक सॉलिड-स्टेट सोडियम-आयन बैटरी का खुलासा किया जो 348.5 Wh/kg का जबरदस्त ऊर्जा घनत्व प्रदान करती है, जो तकनीकी जगत में चर्चा का विषय है।

इस डिजाइन में सिरेमिक-कोटेड संरचना का उपयोग किया गया है और एनोड को पूरी तरह हटा दिया गया है। यह नया दृष्टिकोण न केवल ऊर्जा घनत्व को बढ़ाता है, बल्कि बैटरी की लंबी अवधि की स्थिरता और सुरक्षा में भी सुधार करता है।

सोडियम-आयन बैटरी के तीन प्रमुख लाभ: लागत, ठंड और सुरक्षा

सोडियम-आयन बैटरियां मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में उत्कृष्ट लाभ प्रदान करती हैं: लागत में भारी कटौती, ठंडे मौसम में बेहतर प्रदर्शन और शिपिंग के दौरान सुरक्षा। सोडियम एक सस्ता और दुनिया भर में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध तत्व है।

इसके उत्पादन के लिए कोबाल्ट या निकल जैसे महंगे और दुर्लभ खनिजों की आवश्यकता नहीं होती है। इसे साधारण समुद्री नमक से भी प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, इसमें तांबे की जगह एल्युमिनियम करंट कलेक्टर का उपयोग किया जाता है।

विश्लेषकों का अनुमान है कि सोडियम-आयन सेल की लागत घटकर $40/kWh तक गिर सकती है। यह मौजूदा LFP बैटरी की $70/kWh की लागत से काफी कम है। इस कीमत पर बिना किसी सरकारी सब्सिडी के $20,000 की ईवी बनाना संभव होगा।

ठंडे मौसम में भी सोडियम-आयन सेल अपना दम दिखाते हैं। नेक्स्ट्रा बैटरियां -40°C के तापमान पर भी अपनी 90% क्षमता बनाए रखती हैं। यह लिथियम बैटरी की उस सबसे बड़ी समस्या को हल करता है जहां अत्यधिक ठंड में रेंज कम हो जाती है।

सुरक्षा के मामले में, सोडियम-आयन बैटरी को बिना किसी नुकसान के 0.0V तक डिस्चार्ज किया जा सकता है। लिथियम बैटरी के विपरीत, इसमें इंटरनल शॉर्ट सर्किट का खतरा नहीं होता, जिससे स्टोरेज और ट्रांसपोर्टेशन के दौरान आग लगने का जोखिम न्यूनतम हो जाता है।

हाइब्रिड केमिस्ट्री: सोडियम और लिथियम का बेहतरीन तालमेल

बैटरी निर्माता अब केवल एक प्रकार के सेल पर निर्भर रहने के बजाय 'डुअल-केमिस्ट्री' दृष्टिकोण अपना रहे हैं। इस हाइब्रिड कॉन्सेप्ट में सोडियम और लिथियम सेल को एक ही बैटरी पैक में मिलाकर उपयोग किया जाता है।

इन डिजाइनों में सोडियम-आयन सेल का उपयोग ठंड के मौसम में बेहतर प्रदर्शन और फास्ट चार्जिंग के लिए किया जाता है। वहीं लिथियम-आयन सेल वाहन को लंबी ड्राइविंग रेंज प्रदान करने के लिए हाई एनर्जी डेंसिटी सुनिश्चित करते हैं।

यह मिश्रित दृष्टिकोण वाहन निर्माताओं को अलग-अलग जलवायु और जरूरतों के हिसाब से बैटरी को ट्यून करने की सुविधा देता है। हालांकि, बड़े पैमाने पर इसका कमर्शियल इस्तेमाल अभी भी अपने शुरुआती चरण में है, लेकिन भविष्य उज्ज्वल दिखता है।

वैश्विक बाजार और भारत की बढ़ती भूमिका

पूरी दुनिया में सोडियम-आयन बैटरी का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें चीन सबसे आगे है। CATL, BYD और HiNa Battery जैसी कंपनियां इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपना रही हैं। BYD का नया प्लांट पहले ही उत्पादन शुरू कर चुका है।

भारत में भी रिलायंस (Reliance) और KPIT जैसे प्रमुख खिलाड़ी इस क्षेत्र में निवेश बढ़ा रहे हैं। भारत का मुख्य ध्यान इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और हल्के कमर्शियल वाहनों के लिए सोडियम बैटरी तकनीक को विकसित करने पर है।

यूरोप में फ्रांस स्थित TIAMAT फास्ट-चार्जिंग सेल्स पर काम कर रही है, जबकि अमेरिका में नैट्रॉन एनर्जी ग्रिड-स्केल स्टोरेज पर ध्यान दे रही है। सोडियम की उपलब्धता देशों को लिथियम आयात पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी।

निष्कर्ष: क्या लिथियम का अंत करीब है?

फिलहाल लिथियम बैटरी पूरी तरह से खत्म नहीं होगी, क्योंकि स्पोर्ट्स कारों और लंबी दूरी के ट्रकों के लिए यह अभी भी सर्वश्रेष्ठ है। लिथियम बैटरियां सोडियम के मुकाबले वजन में हल्की और आकार में अधिक कॉम्पैक्ट होती हैं।

हालांकि, आम उपभोक्ता वाली इलेक्ट्रिक कारों के लिए सोडियम-आयन बैटरी अब एक बेहतर विकल्प साबित हो रही है। यह लागत कम करती है, रसद (logistics) को सरल बनाती है और खराब मौसम में भी विश्वसनीय प्रदर्शन की गारंटी देती है।

सोडियम-आयन तकनीक का उदय ईवी उद्योग के लिए एक नए युग की शुरुआत है। लागत, जलवायु और सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करके, यह तकनीक वैश्विक विद्युतीकरण के अगले चरण को नई शक्ति देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

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